Thursday, April 7, 2022

पत्थर से चिंगारी निकलती रहेगी ! -मंजुल भारद्वाज

 पत्थर से चिंगारी निकलती रहेगी !

-मंजुल भारद्वाज

पत्थर से चिंगारी निकलती रहेगी !  -मंजुल भारद्वाज

 

अँधेरे का सम्राट 

यह जान ले 

अँधेरा अजर अमर नहीं है 

उसका एक निश्चित काल है 

अँधेरे का अंत तय है 

अँधेरे का प्रतिरोध 

सदा से है 

जब बिजली नहीं थी 

तब दीया था 

जब दीया नहीं था 

तब जुगनू थे 

जब जुगनू नहीं थे 

तब पत्थर थे 

पत्थर से चिंगारी 

निकलती रहेगी 

अँधेरे में मशाल 

जलती रहेगी 

अँधेरे को परास्त 

करती रहेगी !

#अँधेरा #मशाल #मंजुलभारद्वाज

Wednesday, April 6, 2022

उर्दू भारत की संविधान सम्मत भाषा है ! - मंजुल भारद्वाज

 उर्दू भारत की संविधान सम्मत भाषा है !

- मंजुल भारद्वाज

उर्दू किसी मज़हब

कौम या प्रांत की भाषा नहीं है 

भारत में उर्दू

संविधान सम्मत भाषा है!

किसी के रहमो करम  की भीख नहीं

नोट से लेकर सरकारी महकमों

स्कूल,कॉलेज, विश्वविद्यालय 

रेलवे ,बस स्टॉप तक में 

उर्दू लिखी,पढ़ी और बोली जाती है 

कीचड़ बने चाटुकार चैनलों को 

ना  पता है संविधान

ना है भाषा का ज्ञान!

70 साल में कुछ नहीं हुआ के मारे

भ्रष्टाचार आंदोलन के प्यारे

हल्दी घाटी  के हल्दी 

राम मंदिर के राम वाले हल्दीराम 

अब पिट रहे हैं सारे

जो आज कमल पकड़े खड़ा है

उसका कीचड़ बनना तय है !

किसी भी उन्मादी रंग की पट्टी बांध 

हुड़दंग करने वाले

100 रुपए की दिहाड़ी पर बिकने वाले

पद्मश्री के लिए ज़हर उगलने वाले

लेखक,अभिनेता,फिल्मवाले

व्यंग कवि और गीतकार

सत्ता की बिसात पर 

तुम्हारी क्या औकात?

याद करो कौन बचा

क्या आडवाणी बचे

महबूबा मुफ्ती बचीं

टीडीपी बची

नीतीश बचे

अकाली दल बचा?

जिस जिस ने 

संघ - मोदी का साथ दिया

उन्होंने उसी को डसा !

इतिहास गवाह 

वर्णवाद संस्कृति नहीं

मानवता के लिए अभिशाप है

विकार किसी को नहीं छोड़ता

करता सबका सत्यानाश है !

समय बड़ा विकट है 

बाट जोहता मरघट है

वो जो आज आत्ममुग्ध है 

कल चंदन लगाकर भी महक नहीं पायेगा

चंद मिनटों में स्वाह हो जायेगा

ना तख्त बचेगा ना ताज

कोई नामलेवा 

कहीं नज़र नहीं आयेगा !

Tuesday, April 5, 2022

मनुष्य से इतनी नफ़रत क्यों है? -मंजुल भारद्वाज

 मनुष्य से इतनी नफ़रत क्यों है?  

-मंजुल भारद्वाज

मनुष्य से इतनी नफ़रत क्यों है?    -मंजुल भारद्वाज

हमारे आसपास लाशें ढ़ोते हुए 

बुजुर्ग और महिलाएं दिखाए दे रहे हैं 

इनको हिन्दू प्रधानमंत्री के राज में 

एम्बुलेंस नहीं मिली 

पर क्या किसी को फ़र्क पड़ता है 

70 साल में कुछ नहीं हुआ की शिकार भीड़ को 

सुबह पार्कों में नाख़ून घिसकर

ताली पीटकर हाहाहा करते झुंड को

ज़ोर ज़ोर से विठल विठल चिल्लाते लोगों को 

महंगाई में जलते देश को?

पतंग के मांजे को जानलेवा बनाने वाले 

पक्षियों की जान लेने वाले 

चींटी,कबूतर,चिड़िया को दाना डाल

मोक्ष पाने वाले लोगों को 

क्या फ़र्क पड़ता है?

जब गंगा में बहती लाशों से फ़र्क नहीं पड़ा 

जब घर घर मरघट बना

देश श्मशान,कब्रिस्तान बना 

तब कोई फ़र्क नहीं पड़ा 

आखिर हमारे समाज को  

मनुष्य से इतनी नफ़रत क्यों है?

कैसे ? -मंजुल भारद्वाज


 कैसे ?

-मंजुल भारद्वाज

कैसे ?  -मंजुल भारद्वाज

रोयाँ रोयाँ जिसका नफ़रत से कता हो 

वो कैसे मातृभूमि का जयकारा लगाते हैं ?

वर्णवाद की बिसात पर मोहरों की तरह रखी

जात पात की दासता कैसे भारत की संस्कृति है?

कैसे अन्याय के मूल से उगी शोषण,भेदभाव,नफ़रत,

हिंसा को परवान चढ़ाती रीति रिवाज़ हमारी सभ्यता है?

औरत को अपने पैरों तले रौंदता भारत का मर्दवाद 

कैसे नारियों का बलात्कार कर, माँ को पूजता है?

जिसके नाम से अधर्म का कुचक्र चलाया जाता है

वो मनुष्यता का क़त्ल होते देख कैसे ईश्वर कहलाता है?

Saturday, April 2, 2022

तुम मेरी नई सुबह हो ! -मंजुल भारद्वाज

 तुम मेरी नई सुबह हो !

-मंजुल भारद्वाज 

तुम मेरी नई सुबह हो ! -मंजुल भारद्वाज

ओस की चादर ओढ़े 

अलसाई सी 

रूमानियत भरी रात के बाद 

अंगड़ाई लेती हुई 

उनींदी आखों को

होले होले अपने हाथों से मलते हुए

अपने आगोश में लेते हुए 

मेरे अंदर समा रही हो 

हाँ उम्मीद से भरी 

तुम मेरी नई सुबह हो !

#तुममेरीनईसुबहहो #मंजुलभारद्वाज

शुभ लाभ -मंजुल भारद्वाज

 शुभ लाभ 

-मंजुल भारद्वाज

शुभ लाभ   -मंजुल भारद्वाज

भारत में हर दिन नववर्ष होता है 

सब लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं 

शुभ हो, शुभ हो का जाप कर 

घर के बाहर शुभ लाभ लिखते हैं 

फ़िर भी 50 लाख लोग 

हिन्दू सरकार ने विगत दो साल में 

मौत के घाट उतार दिए 

शायद शुभ लाभ हुआ नहीं 

उम्मीद पर दुनिया कायम है 

आज फ़िर विक्रम संवत से हिन्दू नववर्ष का आरंभ है 

हिन्दू प्रधानमन्त्री है तो शुभ होगा 

राजा विक्रमादित्य की तरह 

सत्तासीन हिन्दू प्रधानमन्त्री 

आज अदानी अम्बानी की सारी सम्पत्ति 

राष्ट्र के नाम कर देंगे 

सभी बेरोजगारों को रोजगार देंगे 

किसानों की आय दुगनी कर देंगे 

मंहगाई की होलिका पर पानी डाल देंगे 

सब सस्ता होगा,सुलभ होगा 

हर नागरिक को घर,पीने का पानी 

स्वास्थ्य सेवा,स्कूल और निर्बाध उज्ज्वला गैस कनेक्शन देंगे 

इतना ही नहीं अपने सारे झूठ,पाखंड 

गुनाह कबूल कर न्यायप्रिय व्यक्तित्व के नाम से 

इतिहास में दर्ज़ होने के लिए 

झोला उठा फ़क़ीर बन जायेंगे 

शुभ लाभ!

कभी सहेली कभी पहेली -मंजुल भारद्वाज

 कभी सहेली कभी पहेली

-मंजुल भारद्वाज

कभी सहेली कभी पहेली  -मंजुल भारद्वाज

ज़िंदगी तुम मुझे हर रोज़ 

अजनबी की तरह मिलती हो

कभी सुलझी कभी उलझी 

कभी मुलायम कभी सख्त

कभी खुशहाल कभी उदास

तुम्हें मैं हर रोज़ पहली बार मिलता हूं

तुम कभी सहेली हो जाती हो

कभी पहेली

तुम्हें बुझते बुझते 

मैं तुम्हें हर बार नया महसूस करता हूं

तुम्हारा सुहावना स्पर्श 

मुझे खिला जाता है

तुम्हारी गरमी तपा जाती है

हर बार एक नयी याद

बही खाते में जमा हो जाती है

ज़िंदगी तुम मुझे जी रही हो

या मैं तुम्हें 

तुम मुझे चला रही हो 

या मैं तुम्हें 

ये कभी कहीं ना मिलने वाला क्षितिज हो जाता है

कभी सांसों में चलती प्राणवायु सा

तेरी प्यास है मुझे

तेरी आस हूं मैं

ज़िंदगी तू कभी मुसीबतों का पहाड़ है

विरह का रेगिस्तान है

कभी उफनता समंदर

कभी धधकता ज्वालामुखी

कभी वक़्त के दामन में 

फूलों का गुलदस्ता

ज़िंदगी अटूट अग्नि सा

मैं जलता रहूंगा

तेरा हर ख्वाब रोशन करता रहूंगा

ज़िंदगी तू बहुत हसीन है

ज़िंदगी तू बहुत खूबसूरत है !

#ज़िंदगीबहुतखूबसूरतहै #मंजुलभारद्वाज

‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज

 ‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज डायरी के पन्ने जब हम पलटते हैं  फुर्सत के पलों में  तो यकायक रोमांचित हो उठते हैं !  खो...