Sunday, September 7, 2025

रात भर - मंजुल भारद्वाज

  रात भर

- मंजुल भारद्वाज

लब सुलगते रहे

शबनम गिरती रही

रात भर !

इठला इठला  कर  चांद

इतराता रहा

आंखों में नींद

जलती रही 

रात भर !

तेरे आंचल के सितारे 

जगमगाते रहे

मेरी चाहत के 

कोरे पन्ने

फड़फड़ाते रहे

रात भर !

परवाने उड़ते रहे

चरागों में जलते रहे

मन्द मन्द सांसों की

ताल पर

तन्हाई नाचती रही

रात भर !

रात भर - मंजुल भारद्वाज लब सुलगते रहे शबनम गिरती रही रात भर ! इठला इठला  कर  चांद इतराता रहा आंखों में नींद जलती रही  रात भर ! तेरे आंचल के सितारे  जगमगाते रहे मेरी चाहत के  कोरे पन्ने फड़फड़ाते रहे रात भर ! परवाने उड़ते रहे चरागों में जलते रहे मन्द मन्द सांसों की ताल पर तन्हाई नाचती रही रात भर ! #रातभर #मंजुलभारद्वाज https://www.torfoundationindia.org/

#रातभर #मंजुलभारद्वाज

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