Wednesday, September 10, 2025

नियामत - मंजुल भारद्वाज

  नियामत

- मंजुल भारद्वाज

तुम्हारी आंखें 

अफ़साना लिखती हैं

मौन रह कर

हमेशा बोलती हैं !

तुम कुदरत की 

इनायत हो

तुम्हारी मुस्कराहट

एक इबादत है !

तुम्हारे लबों पर 

तैरती दुआ

फ़िज़ा में गूंजता 

मोहब्बत का नग़मा है !

तुम

बंदगी का कलमा

आशिकों की फ़रियाद

ज़िंदगी की 

नियामत हो!

#आंखें #नियामत #मंजुलभारद्वाज

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