नियामत
- मंजुल भारद्वाज
तुम्हारी आंखें
अफ़साना लिखती हैं
मौन रह कर
हमेशा बोलती हैं !
तुम कुदरत की
इनायत हो
तुम्हारी मुस्कराहट
एक इबादत है !
तुम्हारे लबों पर
तैरती दुआ
फ़िज़ा में गूंजता
मोहब्बत का नग़मा है !
तुम
बंदगी का कलमा
आशिकों की फ़रियाद
ज़िंदगी की
नियामत हो!
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