सियासतदां
-मंजुल भारद्वाज
बड़ा मासुम है सियासतदां
क़त्ल कर कहता है
सिर्फ़ ‘सुला’ दिया
बड़ा शातिर है सियासतदां
शरीफों की तरह आता है
चुनावी जलसे में
हर बार ‘लूट’ के ले जाता है
गजब बहरूपिया है
हर आईने को रिझाता है
जो ‘आईन’ दिखाए
उस हर आईने को तोड़ता है
शह,मात का माहिर सियासतदां
वक्त की ‘चाल’ में फंसता है
रंक से राजा,
राजा से रंक हो जाता है सियासतदां!
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#सियासतदां #मंजुलभारद्वाज
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