विकास की होली में जलता देश!
-मंजुल भारद्वाज
विकास की लालच
देश को लील गई
अच्छे दिन की दलील
स्याह रातों में तब्दील हो गई
पाखंडियों के संघ ने अज्ञानता के प्रचारक
मीडिया की मंडियों में बिठा दिए
संस्कार,संस्कृति के नाम पर
पाखंड के नारे 24घंटे लगवा दिए
अज्ञानता का कूड़ा हर तरफ़ फैला दिए
स्वच्छता की सेंध सरकारी तिजोरी पर लगवा दी
भागीदार बनकर चौकीदार ने चोरी करवा दी
जुमलों के पाखंडी रोज़ पीटे ढोल
राफ़ेल के घपले की खुल गई पोल
अदानी-अम्बानी ने देश को जमकर लूटा
खाऊंगा ना खाने दूंगा का नारा खूब लगाया
माल्या,मेहुल,नीरव को लूट का माल
पैक कराकर विदेश भगाया
मन की बात का डंका पीटे
इतिहास,भूगोल अपना सर पीटें
गरीब गरीब का रोना रोए
विदेशों के दौरों पर ठाठ से जाए
चाय की हमदर्दी
बनगई देश की सरदर्दी
2025, 2050, 2070
तारीख पर तारीख बताए
सुबह बोला हुआ शाम को भूल जाए
देश को अपनी जागीर बताए
मैं हूँ कलकी अवतार का प्रचार कराए
सवाल पूछने पर देशद्रोही
लोकतंत्र की आवाज़ दबाए
विकास की होली में जलता देश
लोकतंत्र की दीवाली तब मनायेगा
जब विनाश की ‘होली’ से बच पायेगा!
...
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