लोकतंत्र के प्रहरियों सचेत हो
-मंजुल भारद्वाज
लोकतंत्र के प्रहरियों सचेत हो
लोकतंत्र की चुनौतियों से अभिप्रेत हो
होशियार,खबरदार
एक बहेलिया डाल रहा
जुमलों का दाना
तुम उन्हें ना चुगने जाना
बार बार वो गाए गाना
मिनट मिनट में बदले बाना
अजब गजब करबत पाखंड
ताली पीटे,छाती कूटे
ताल ठोके, गुर्राए
पार ना चले तो
घडियाली आंसू बहाए
संस्कार,संस्कृति,हिंदुत्व
राष्ट्रवाद का राग अलापे
राफ़ेल में करे घोटाले
आत्महीन विकारग्रस्त है
सारी जनता आज त्रस्त है
भीड़तन्त्र बनाना चाहे
चारों और तबाही लाये
भीड़ नहीं अब बनाना है
विवेक,विचार से चलना है
लोकतंत्र है लोक का तन्त्र
वोट है उसका मन्त्र
सूझबुझ से मत देना है
व्यक्ति नहीं अब नीति को चुनना है!
...
#लोकतंत्र #वोट #मंजुलभारद्वाज
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