रश्मि ने बादलों की चादर के बाहर झांका
मौसम बदल गया
हालात की धुंध छटी
भ्रम टूटा, नजरिया बदला
प्रचलित सत्य,सत्य,काव्यात्मक सत्य
वैज्ञानिक सत्य की परतें खुलती गई
नई दृष्टि से सृजित हुई नई सृष्टि!
- मंजुल भारद्वाज
आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … आम्ही ज...
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