Wednesday, November 6, 2019

द्वंद्वात्मक अंतर्द्वंद्व -मंजुल भारद्वाज

द्वंद्वात्मक अंतर्द्वंद्व
-मंजुल भारद्वाज
ऐसा लगता है
जैसे मैं काल से आगे
और
दुनिया वक्त से बहुत पीछे है
यही अमूर्त के मूर्त होने का
द्वंद्वात्मक अंतर्द्वंद्व है
सृजन संघर्ष है
सृजनकार के
तत्व,व्यवहार,प्रमाण और सत्व की
शाश्वत चुनौती!
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