Wednesday, November 6, 2019

सृजनकार ! -मंजुल भारद्वाज

सृजनकार !
-मंजुल भारद्वाज
पांच तत्वों से सृजित
जीवन दृश्य श्रव्य है
दृश्य-अदृश्य की लुकाछिपी
सुना-अनसुना की जुगलबंदी
वाक् पटुता,मौन प्रकियाओं से
समय के पटल पर
निराकार से साकार
साकार से निराकार होता है
आत्महीनता से जनित
विकार विध्वंस
आत्मबल से सृजित
विचार सृजन के
समुद्र में जीवन को मथते हुए
सम भाव ध्वनियों का सुर छेड़ता है
स्वरलहरियों में छिपे
ज्ञान को शब्दबद्ध कर
सृजन संगीत बजाता है
जिसमें झूमता है विश्व
अपने जीवन लक्ष्य की
स्वरलहरियों के साथ !
...
#सृजनकार #मंजुलभारद्वाज

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