तरंग
-मंजुल भारद्वाज
ब्रह्मांड में तैरता हुआ
रंग है तरंग
रंग यानी विचार
विचार मनुष्य का भाव विश्व
तरंग का प्रभाव
दृष्टिकोण के प्रिज्म से
गुजरने के बाद तय होता है
रंगों का सकारात्मक
समग्र दृश्य है दृष्टि
तरंगों की कलात्मक आभा से
जन्मता है कलाकार
तरंगों को साधना
कलाकार की नियति
प्रकृति और समर्पक प्रतिबद्धता है!
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