Wednesday, November 6, 2019

सत्ताधीश चाहता है -मंजुल भारद्वाज

सत्ताधीश चाहता है
-मंजुल भारद्वाज
सत्ताधीश चाहता है
दूधमुहें नौनिहालों की मौत हो
माताओं की गोद सूनी हो
प्रलाप हो,विलाप हो
हृदय विदारक दृश्य पर
दिन रात इक्का दुक्का बची
विवेक सम्मत कौम
अपना सर धुने,पोस्ट लिखे
चर्चा करे उसकी निर्लज्जता की
सत्ताधीश इन हत्याओं से
साबित करना चाहता है की
70 साल में कुछ नहीं हुआ
सत्ताधीश चाहता है आपकी
तर्क बुद्धि नष्ट हो
आपकी विवेक बुद्धि का राडार
उसके गुनाहों को पकड़ ना पाए
उसका विध्वंसक चेहरा
आपकी त्रासदी के भावनात्मक
बादलों से ढक जाए
सत्ताधीश चाहता है
किसान आत्महत्या करें
उसके अहंकार की तुष्टि के लिए
वो अपनी खोपड़ी लेकर
दिल्ली में अपना पिशाब पीयें
सत्ताधीश के सामने गिडगिडायें
ताकि चुनाव के समय
वो सिर्फ़ 2000 रूपये में
उनका वोट खरीद सके
सत्ताधीश चाहता है
युवा बेरोज़गार रहे
पकौड़े तले, निठल्ला रहे
ताकि सताधीश चंद सिक्के फ़ेंक
झूठे राष्ट्रवाद का उन्माद
युवाओं में फ़ैलाने के लिए
मोटर साइकल पर तिरंगा यात्रा निकाल सके
सत्ताधीश चाहता है महिलाओं पर अत्याचार हो
हिंसा और बलात्कार हो
ताकि वो घर की चारदीवारी में क़ैद हों
उसके एजेंडे को लागू करें
करवाचौथ और वट सावित्री के
पाखंड में उलझी रहें
महिला गुलाम होगी तभी तो
उसकी फ़ोटो की साड़ियाँ पहनेगी
चुनाव में उसको अपना रक्षक
साबित कर प्रचार करेगी
सत्ताधीश चाहता है मोबलिंचिंग हो
ताकि वो मौन रहने का पाखंड कर सके
गुफाओं में साधना कर सके
धार्मिक भावनाओं का दोहन कर सके
हिन्दू राष्ट्र का हिन्दू प्रधानमंत्री बन सके
संविधान का माथा चूम
सलीब पर चढ़ाने के पहले
उसकी अंतिम इच्छा पूछ सके
सत्ताधीश चाहता है
जनता लाइन में 24घंटे खड़ी हो
पुलिस की लाठियां खाए
इससे वो आजमाता है
उसकी सनक की कितनी धमक है
नोटबंदी से कितनो की जान ले सकता है
काले धन को अपने पार्टी फण्ड में जमा कर
आलिशान महल बनवा सकता है
मध्यमवर्गीय कौम से गुणगान करवा सकता है
अरे वो अकेला है
उसका परिवार नहीं है
वो क्यों लूटेगा का मन्त्र जाप
परिवारों में करवा सके
और चाय का नाम ले
वो आराम से देश
पूंजीपतियों को बेच सके
सत्ताधीश चाहता है
हर कोई उसकी ऊँगली पर नाचे
पत्तलकार उसके थूक को मक्खन समझ
चाटते रहें
भेड़ें जयकारा लगाती रहें
और विवेकशील कौम
अपने विवेक में जल
आत्महत्या कर लें
क्योंकि सत्ताधीश भेड़ों का मसीहा है
कलकी अवतार है
जो देशभक्ति के पाखंड में दक्ष है
सरहद हो, घर का आंगन हो
या माँ की गोद
युवाओं का जोश
अपने सिंहासन के लिए
वो हर एक की बली लेना जानता है !
...
#सत्ताधीश #मंजुलभारद्वाज

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