‘प्रेरणा’ स्वरूप को जगाइए
-मंजुल भारद्वाज
अतीत का एक हसीन पल
वर्तमान को महका देता है
जागती उमंगों से
मायूसी के बादल छट जाते हैं
वर्तमान की उदासी
मवाद,विषाद,विरक्ति को
तोड़ता है अतीत का सद्कर्म
दरकार है यादों के एक हसीन
लम्हें के दीये को जलाने की
नज़र,नजरिया सकारात्मक है
तो अतीत खूबसूरत धरोहर है
जो वर्तमान की निराशा में
सपने सजाती है उज्ज्वल भविष्य के
अपने सद्कर्म,सृजनात्मक लम्हों की
संघर्ष यात्रा की साधना में पैठ
वर्तमान की आंधी से बुझे
‘प्रेरणा’ स्वरूप को जगाइए
काल का चक्र चलता है
पर हमेशा याद रखो
तुम ही तो हो अपना काल
तुम ही रचते हो
भूत,वर्तमान और भविष्य
क्योंकि तुम ही हो
अपने ब्रह्म!
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