समंदर
-मंजुल भारद्वाज
हर गुमनाम को एक नाम देता है समंदर
हर अजनबी को एक पहचान देता है समंदर
हर उदासी को सोख लेता है समंदर
हर हारे हुए को उम्मीद देता है समंदर
हर पराये को अपनाता है समंदर
हर गरुर को उसकी औकात बताता है समंदर
परिश्रम,प्रण,प्रतिज्ञा,गरिमा,गहराई,उमंग,तरंग
निरंतर साधना के मोतियों से भरा है समंदर
झूठ, अहंकार,दम्भ,जलन,संकीर्णता
के कचरे को बाहर फेंकता है समंदर
दायरों, सीमाओं में बंधे यथार्थ के किनारों को
नये क्षितिज देता है समंदर !
आपके अकेलेपन का साथी,दिल के घावों का मरहम
कल्पनाओं के किलों की दीवार,मीनार,गुंबद
पैबंद,राज़दार,सपनों के नाव की पतवार है समंदर
आँखों में उठते शोले,साँसों में दहकते अरमान
गर्म हवाओं की प्यास बुझाता,बादलों का जमीनी कैनवास
मिलन की आस में दौड़ती अनंत नदियों का
हासिल,मुकाम,लक्ष्य,साध्य और तृप्ति है समंदर
अकेलपन की गहराइयों में दिशाहीन होते
हौंसलों का एंकर है समंदर
एक सुर ,एक साज़, एक आवाज़
कला और जीवन का गीत है समंदर
सूरज चाँद की कलाओं से खेलती
वसुंधरा के सौन्दर्य,लावण्य,अदा,
आँसूओं के नमक, लबों की हंसी
पर थिरकता,नाचता ,गर्जता
एक पथिक,राहगीर,एक अनंत सफ़र का मुसाफिर
जीवन का कलात्मक गीत गाता
एक कलाकार है समंदर !
#समंदर #मंजुलभारद्वाज
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