परिवर्तित का परावर्तित परिभाषित है
-मंजुल भारद्वाज
सर्द मौसम में धूप सेकना
बारिश में मिट्टी की सौंधी सौंधी
खुशबु से मन का महकना
भीगते जिस्म से
सुलगती आग में तपना
पिघलकर बर्फ़ का बह निकलना
बसंत का खिलना
चाहत की भीनी भीनी
चादर में लिपटे रहना
परिवर्तित का परावर्तित परिभाषित है!
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