ध्वनि –प्रतिध्वनि
-मंजुल भारद्वाज
ध्वनि ; हर हर गंगे
प्रतिध्वनि : मर रही गंगे
ध्वनि : गंगा आधार
प्रतिध्वनि : गंगा निराधार
ध्वनि :निर्मल धारा
प्रतिध्वनि;गन्दा नाला
ध्वनि :भारत की आत्मा
प्रतिध्वनि:तुम दुष्ट आत्मा
ध्वनि :जीवन,उर्जा और विकास
प्रतिध्वनि:लालच,विध्वंस और विनाश
ध्वनि : गंगा की पुकार
प्रतिध्वनि :हाहाकार
ध्वनि: संस्कृति, एक विचार
प्रतिध्वनि:पाखंड और विकार
ध्वनि : मैं गंगा पुत्र
प्रतिध्वनि:भ्रष्ट कुलषित षड्यंत्र
ध्वनि : नमामि गंगे
प्रतिध्वनि:करहाती गंगे
......
(करहाती गंगे और अपनी प्रतिध्वनि से भागते #भारतवासियों को समर्पित)
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