प्रतीकात्मक लोकतंत्र घातक है !
- मंजुल भारद्वाज
लोकतंत्र घूमता है
लोकप्रियता के पहिये पर
जहाँ ‘पूंजी’ का इंजन
‘तन्त्र’ को दौड़ाता है
मन मुआफ़िक दिशा में
अपने अंदाज़ और आवेग में
नीति और विवेक दौड़ते है
उसके पीछे पीछे हांफते हुए
देखते और दिखाई देते है
मुख्य धारा , दर, दरवाज़े की बजाय
‘विकल्प’ की खिडकियों से झांकते हुए
लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है
लोक सहभागिता
उस सहभागिता की राजकीय वैधता
लोकतंत्र की त्रासदी है
प्रतीकात्मक सहभागिता
जो घातक है ‘लोकतंत्र’ के लिए
‘प्रतीकात्मकता’ विद्रूपता
ज़ोर ज़ोर से ठहाके लगाती है
और बडबड़ाती रहती है
जनता का , जनता के लिए , जनता के द्वारा
लोकतंत्र ,लोकतंत्र , लोकतंत्र ...
#प्रतीकात्मक #लोकतंत्र #मंजुलभारद्वाज
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