Tuesday, November 5, 2019

मुझे अपेक्षा है ऐसे रंगकर्म की - मंजुल भारद्वाज

मुझे अपेक्षा है ऐसे रंगकर्म की
-मंजुल भारद्वाज


भूमंडलीकरण के वस्तुकरण के भयावह दौर में
जहाँ मनुष्य ‘वस्तु’ बनने और बनाने को श्रेष्ठ मानता है
मेरी रंगकर्मियों से अपेक्षा है
अपने रंगकर्म में ऐसा दृश्य दिखाएं
जिसे देख सिद्दार्थ बुद्ध बन जाए
संवाद में कबीर की वाणी हो
जो धर्म और विकार के पाखंड को उजागर करे
जाति,राजा और रंक का भेद मिटे
नानक का एक संगत,एक पंगत का सपना साकार हो
जज्बा,जोश, भाव एक इंकलाब हो
हर दर्शक को भगत सिंह का अहसास हो
कला का ऐसा सौन्दर्यबोध हो
जो जन्म आधारित कुरूपता से
लड़ने का जज्बा पैदा करे
जन्म के संयोग को चुनौती देने वाले योद्धा
अम्बेडकर से प्रेरित हो संविधान का अनुसरण करे
मुझे अपेक्षा है ऐसे रंगकर्म की
जिसे देख कोई मोहनदास
सत्य की डगर पर चलना सीख ले!
...
#रंगकर्म #बुद्ध #कबीर #नानक #भगतसिंह #अम्बेडकर #गांधी #मंजुलभारद्वाज
(27 मार्च,विश्व रंगमंच दिवस पर रंगकर्मियों से अपील)

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