Tuesday, November 5, 2019

बोध,संबोध,अबोध -मंजुल भारद्वाज

बोध,संबोध,अबोध
-मंजुल भारद्वाज
बोध,संबोध,अबोध
बोध ज्ञान
संबोध सम्पूर्ण ज्ञान
अबोध अनंत बोध
कौन,कब,कहाँ
क्यों और कैसे
बोध से संबोध
संबोध से अबोध
तरंग क्षेत्र से तरंगित
प्रवाहित,सम्प्रेषित होता है
यह विश्व का गुढ़ रहस्य है
कोई अपने सद्कर्म में पैठ
इसी धरा पर उससे
एकाकार हो जाते हैं
कोई एकाकार हो
खंड खंड विखंडित
हो जाते हैं
बोध,संबोध,अबोध
तीन शब्द
तीन लोक
तीन काल
एक बिंदु का वृत्त
वृत्त से आवर्तित वृत्त
बिंदु का अनंत या
अनंत का बिंदु
एक स्त्रोत तो दूसरा समागम
ज्ञान,सम्पूर्ण ज्ञान
अनंत ज्ञान
ब्रह्माण्ड की अनंत यात्रा !
...
#बोध #संबोध #अबोध #मंजुलभारद्वाज

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