Tuesday, November 5, 2019

हूक इश्क है! -मंजुल भारद्वाज

हूक इश्क है!
- मंजुल भारद्वाज
हूक की तीव्रता
पानी में पानी का
पर्वत खड़ा कर देती है
उसकी चुम्बकीय शक्ति
एक एक बूँद को जोड़ती है
उसकी विधुतीय उर्जा से
एक एक बूंद चमकती है
जैसे किसी हसीना के
माथे का नमकीन पसीना
हूक का आवेग
समन्दर को हवाओं के परों पर उड़ा
आसमान को समन्दर बना देता है
हूक जब कौंधती है
तब समन्दर दहाड़ता है
आसमान टूट कर बरसता है
भिगोता है विरह में तपती
वसुंधरा को
सौंधी सौंधी खुशबू से
महकती है फ़िज़ाएं
सृजित करती हैं
नव जीवन
हूक इश्क है
जो आग,पानी
मिट्टी,हवा और आसमान को
एकाकार करती है
सृजन के लिए !
...
#हूक #इश्क #मंजुलभारद्वाज

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