Wednesday, November 6, 2019

खुमारी - मंजुल भारद्वाज

खुमारी
-मंजुल भारद्वाज
मैं अपनी ही खुमारी में हूँ
अपने रंगकर्म से अंतरविरोधों को
रचनात्मक दिशा में मोड़ता हुआ
बियाबान घुप्प नफरत के अंधरों में
मोहब्बत के दरीचे और रोशनदान खोलते हुए
पहर बदलती घड़ी पर नजर रखते हुए
द्वंद्वात्मक,अंतर्द्वंद्व के आत्म संघर्ष में
अंतर्दृष्टि के उजाले में
बुद्ध की अहिंसा का
राजनैतिक प्रयोग कर
मार्क्स के हिंसा की स्वीकार्यता को
नकारते हुआ गांधी की क्रांति के
राजनैतिक अहिंसा प्रयोग को
मथते हुए
नए मोहब्बत के पैगाम
लिख रहा हूँ!
...
#खुमारी #गाँधी #मार्क्स #मंजुलभारद्वाज

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