प्यार
...... मंजुल भारद्वाज
कदम दर कदम संभल कर रख
प्यार की इमारत दिल की नाजुक
ज़मीन पे खड़ी होती है
ये अलग बात है की
प्यार संभलने की मोहल्लत कहाँ देता है
बस हो जाता है...
दस्तूर, परम्परा ,रीत और रिवाज़
सब धरे रहे जाते है...
जब होता है प्यार का आगाज़
अजब गजब है ये दुनिया का खेला
उसी का दुश्मन जिससे सजाता है
इसका मेला
महके जिससे जीवन
जिससे खिले संसार
वो है बस प्यार ..प्यार
और प्यार......
...
#प्यार #मंजुलभारद्वाज
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