मैं विवेक हूँ!
-मंजुल भारद्वाज
तेरे पास सत्ता है
पूर्ण भेड़तंत्र का बहुमत है
भूमंडलीकरण के अभिशाप
खरीदो और बेचो के
विकार से पसरी
मनुष्यता के विध्वंस की महामारी
साम,दाम,दंड,भेद की आड़ में
पाखंड,प्रपंच के मकड़जाल को
बुनने वाले शातिर
तू राजनेता नहीं राजनीति का कोढ़ है
भूमंडलीकरण के दौर में
अर्थहीन हुए समाज की भीड़ में
जीवन का अर्थ खरीदती भेड़ों से
तूने पैसे से मत खरीदें हैं
नीति से अनभिज्ञ सत्तापिपासु
तू चाहे कितनी ही गुफाओं में छिप जा
मुझसे भाग नहीं पायेगा
भेड़ों के जयकारे के शोर में
मुझे दबा नहीं पायेगा
जितना मुझे दबायेगा
उतना मेरा तेज तुझे जगायेगा
मैं कहीं बाहर नहीं
तेरे भीतर हूँ
तू दुनिया से सब जीत ले
मुझसे नहीं जीत पायेगा
मैं ‘विवेक’ हूँ
अन्तोगत्वा तू मेरी शरण ही आयेगा !
...
#विवेक #मंजुलभारद्वाज
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