Tuesday, November 5, 2019

शांति -मंजुल भारद्वाज

शांति
-मंजुल भारद्वाज
शांति जीवन में खोजते सब हैं
शांति रहती है दो के पास
एक अज्ञानी और दूसरा ज्ञानी
बाकी सब शांति के नाम पर
पौ बारह के फ़ेर में
चिंता की माला फेरत
चिता में स्वाह हो जाते हैं
अज्ञानी वो है जो
मनुष्य का आकार लिए हुए भी
प्राणी मात्र है
पेट भरने तक उनका जीवन लक्ष्य है
ज्ञानी वो जो पेट को
अपने चिंतन से शांत करते हैं
इस सृष्टि के आदि और अंत को जानते हैं
ज्ञानी अज्ञानी के बीच बसता है
एक विशेष वर्ग
जिसको कहते हैं मध्यमवर्ग
आधुनिक विश्व में इसकी बहुतायत है
विकसित से लेकर विकासशील देश
शांति स्थापना के नाम पर
नरसंहार करने वाले हथियारों से
लैस सेना को पालते हैं
सेनाएं सिर्फ़ मानवता को लहुलहान करती है
शांति स्थापित नहीं कर पाती
भय पैदा करती है
मध्यमवर्ग भयाक्रांत रहता है
यह चिंता का कोढ़ है
संस्कार,परम्परा,संस्कृति का दीमक है
आडम्बरों,पाखंडों.प्रपंचों का जाल है
यह ना चल पाता है
ना दौड़ पाता है
ज्ञान अज्ञान के बीच
जीवन भर रेंगता रहता है
मोक्ष प्राप्ति की परम इच्छा
भौतिक सुख की अगरबत्ती बन
इनके जीवन को महकाती है
चिता पर लिटाई गई इनकी मृत देह
चंदन,गंगा जल और घी से शुद्द होती है
यही संस्कार यह अपनी पीढ़ी को दे
मोक्षधाम से सीधे स्वर्ग पहुँचते हैं
शांति ताउम्र पृथ्वी पर भटकती रहती है!
...
#शांति #मंजुलभारद्वाज

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