पत्थर
-मंजुल भारद्वाज
पत्थर वक्त के साक्षी होते है
उनके जिस्म पर
इतिहास लिखे होते हैं
कहाँ,कब,क्या घटित हुआ
अपने दामन में समाएं होते है
ये चुपचाप नहीं मिलते
हवाओं के निशां गुदाए रहते हैं
यह निर्जीव नहीं
कालखंड के होने का
जीवित प्रमाण हैं
ख़्वाब देखते हैं पत्थर
वरना शिल्प कैसे बनते
बोलते हैं पत्थर
वरना ध्वनि कैसे होती
सोये को जगाते हैं पत्थर
वरना ठोकर का अहसास
कहाँ होता
जिंदा होते हैं पत्थर
वरना आग कैसे लगती
इन्हें यूं ना देखो
जरा गौर करो
अपने अंदर भगवान
समाएं होते हैं पत्थर!
...
#पत्थर #मंजुलभारद्वाज
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