मेरी आवाज़
-मंजुल भारद्वाज
मेरी आवाज़
मेरी परवाज़
बेड़ियों के टूटने का आगाज
हैवानी मंसूबों के बरक्स
इंसानी संबल
गुलशन में अमन की बयार
कुढ़ते,कुंठित,कुलषित
द्वेष,दुर्भावना से दूषित
मैले मन को प्रेम वर्षा से धो
मोहब्बत का नूर लिए
बुलंद हो गूंजेगी
हर रूह को छू लेगी
मेरी आवाज़!
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#आवाज़ #मंजुलभारद्वाज
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