लक्ष्य
- मंजुल भारद्वाज
सत्ता नहीं
चैतन्य बोध
सत्ता नहीं
सत्य की खोज
सत्ता नहीं
सभ्यता
आधिपत्य नहीं
जन कल्याण !
‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज डायरी के पन्ने जब हम पलटते हैं फुर्सत के पलों में तो यकायक रोमांचित हो उठते हैं ! खो...
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