Thursday, July 30, 2026

कवि सूर्य को साधता है - मंजुल भारद्वाज

 कवि सूर्य को साधता है

- मंजुल भारद्वाज


कवि सूर्य को साधता है 

उसे कोई फ़र्क नहीं पड़ता

कोई उसके साथ खड़ा हो 

या ना हो

वो तपता है मनुष्य रूपी 

भेड़ों को मनुष्यता का 

अहसास दिलाने के लिए !


कवि सूर्य को साधता है  - मंजुल भारद्वाज


वो चमकता रहेगा 

हर सुबह को संवारता हुआ 

कबि का लिखा 

पढ़ता है काल 

लेता है सबका हिसाब 

हर पापी, जुल्मी को फ़नाकर 

सुपुर्द-ए-खाक करता है 

इसी ज़मीन पर !


#कवि #सूर्य #मंजुलभारद्वाज

No comments:

Post a Comment

‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज

 ‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज डायरी के पन्ने जब हम पलटते हैं  फुर्सत के पलों में  तो यकायक रोमांचित हो उठते हैं !  खो...