बारिश सा मन
-मंजुल भारद्वाज
बूंदों की आवाज़ आ रही है
जैसे कोई बुला रहा है
मल्हार गाते हुए
बारिश की चिलमन
बारिश की बंदिश
बारिश सा मन
भीग रहा है
सुलगता हुआ
हां अवश्य जंगल में कहीं
मोर नाच रहा होगा!
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