बारिश सा मन
-मंजुल भारद्वाज
बूंदों की आवाज़ आ रही है
जैसे कोई बुला रहा है
मल्हार गाते हुए
बारिश की चिलमन
बारिश की बंदिश
बारिश सा मन
भीग रहा है
सुलगता हुआ
हां अवश्य जंगल में कहीं
मोर नाच रहा होगा!
#बारिशसामन #मोर #मंजुलभारद्वाज
आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … आम्ही ज...
No comments:
Post a Comment