Monday, November 4, 2019

मैं आदि और अंत हूँ - मंजुल भारद्वाज

मैं आदि और अंत हूँ
-मंजुल भारद्वाज

दो नितम्ब
एक गर्भाशय
एक योनि
मात्र नहीं हूँ मैं
मैं विश्व का
विधान,संविधान हूँ
मैं सृष्टि हूँ
प्रकृति हूँ
मैं ब्रह्म हूँ

जन्म,वजूद
हैसियत,अस्तित्व
व्यक्ति,व्यक्तित्व
जीवन और मृत्यु
मुझसे है
मेरी प्रतिशोध प्रतिज्ञा में
सभ्यताएं नष्ट हो जाती हैं
मेरे प्रण से धरती फट जाती है

मैं रस्मो रिवाज़ का ठीहा नहीं हूँ
सिंदूर पोतने और मंगल सूत्र
चढ़ाने वाला पत्थर नहीं हूँ
मैं आग हूँ
मेरा अंश ही है वंश
अपने रक्त,मेरु,मज्जा से
अपने ही ममत्व में भीगती हुई
दुनिया को रचती हूँ
मैं आदि और अंत हूँ!
...
#आदि #अंत #नारी #मंजुलभारद्वाज

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