Tuesday, November 5, 2019

यह सिर्फ़ दलाल हैं -मंजुल भारद्वाज

यह सिर्फ़ दलाल हैं
-मंजुल भारद्वाज
यह प्रगतिशील गिरोहबाज लुटेरे
लूट लेते हैं आपसे आपके सपने
बेच आते हैं सत्ता को आपके हक्क
आपके अंदर उठती हर
परिवर्तन लहर को
एक रंग में रंग लेते हैं
यह गिरगिट और सियार
मूल आमूल व्यवस्था
परिवर्तन के सूत्रों पर
कुंडलीमार बैठ जाते हैं
यह इस कदर बेहया और निर्लज्ज हैं
इंसानियत की चिता पर सेंकते हैं
अपनी रोटियाँ यह प्रगतिशील
जनता को सबसे ज्यादा
इन्होने ठगा और अंधी गह्वर में धकेल दिया
मजदूर की लड़ाई,संघर्ष के गीत
क्रांति के नगमें सुनाने वाले
आज कहाँ है? है कोई वजूद?
कोई अस्तित्व?
एक सत्ता के नवाजे पुरस्कार को
दूसरी सत्ता को लौटाने का
पाखंड,स्वांग रचते हैं
अभिव्यक्ति स्वतन्त्रता का
कोई पूछे इन कला के दलालों से
जिस सत्ता को इन्हें तमगों से सज्जित किया था
उसे आईना दिखाते तो
आज के सत्ताधीश सत्ता आसीन होते?
अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के शोर में
यह छिपाना चाहते हैं
अपने सत्ता चापलूसी के गुनाह
धोना चाहते हैं अपने कुकर्मों के दाग़
कलाप्रिय जनता यह स्मरण रहे
यह सिर्फ़ दलाल हैं
आपके साथीदार नहीं!
...
#कला #जनता #दलाल #मंजुलभारद्वाज

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