शिथिल है सब
-मंजुल भारद्वाज
शिथिल है सब
भागते हुए शरीर
सोया हुआ मनुष्य
जयकारा लगाती भेड़ें
निद्रामय समाज
रिसता हुआ सत्ता मवाद
सोई हुई राजनैतिक चेतना
हडकम्प मचाती अवसरवादिता
सोया हुआ अवसर
दिशाहीन भटकती गति
सोयी हुई दिशाएं
किसी विकराल विध्वंस की
प्रतीक्षारत!
...
#शिथिलहैसब #मंजुलभारद्वाज
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