Thursday, November 7, 2019

अपनी -मंजुल भारद्वाज

अपनी
-मंजुल भारद्वाज
अनजान एक डगर
पास पहुँचती है
सीधे दिल में उतरकर
साथ साथ चलती है
एक सवाल लिए
एक खोज की तरफ़ निकलती है
इस पार से उस पार की यात्रा में
अपनापन लिए शून्य से एकाकार
अन्तर्द्वन्द्व का अंतर्नाद
प्रकृति के अनहद से मिलता है
सृजित करता है एक भाव
नीयत और नियति को स्पष्ट करते हुए
ब्रह्मांडीय तरंगों को समेटे हुए
आत्मा में पैठता है निर्वाण!
..
#अपनी #मंजुलभारद्वाज

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