Tuesday, November 5, 2019

महदूद नहीं है मेरा इश्क -मंजुल भारद्वाज

महदूद नहीं है मेरा इश्क
-मंजुल भारद्वाज

महदूद नहीं है मेरा इश्क
ये दायरे तोड़ फ़िज़ा में महकता है
सागर में आये ज्वार की मानिद
किनारों की हदे लांघता है.......
...................महदूद नहीं है मेरा इश्क
ये दायरे तोड़ फ़िज़ा में महकता है
उम्मीद के रथ पर सवार
काले बादलों के बीच
चाँद सा चमकता है
मेरा इश्क
......................... महदूद नहीं है मेरा इश्क
ये दायरे तोड़ फ़िज़ा में महकता है
शब –ऐ-हिज़्र से निकल
सूरज सा रोशन करता
है जहाँ को मेरा इश्क
.................................. महदूद नहीं है मेरा इश्क
ये दायरे तोड़ फ़िज़ा में महकता है

#महदूद #इश्क #मंजुलभारद्वाज

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