ईश्वर तो निर्गुण है!
-मंजुलभारद्वाज
किसी पोथी में व्यक्ति वर्णित
शुद्ध सत्ताधीश को तुम ईश्वर मानते हो
किसी भी सत्ता युद्ध को धर्मयुद्ध
कहने वाले को तुम ईश्वर मानते हो
अपनी सम्पति को पाने
उसके लिए युद्ध जीतने के
महिमामंडित सत्ता के युद्धशास्त्र को
तुम धर्म शास्त्र मानते हो
मानवकल्पित पाषणशिल्प को
तुम ईश्वर मानते हो
हिंसा,वध,रक्तपात करने वाले को
तुम ईश्वर मानते हो
पर ईश्वर तो निर्गुण है
दिव्य वास्तुशिल्प में स्थापित
पाषणशिल्प को तुम ईश्वर मानते हो
तो अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करो
और बताओ
जो ब्रह्माण्ड के कण कण में
विराजमान है वो कौन है?
जो मन्दिरों, मस्जिदों, गिरिजाघरों में नहीं
समस्त जगत में स्थापित है वो कौन है?
जो सुंदर,सत्य और प्रेम से सराबोर है
वो कौन है?
साम,दाम,दंड,भेद
ये सत्ता संचालन के सूत्र हैं
इनको अमल में लाने वाला
ईश्वर नहीं, मनुष्य है
जो निराकार है,निर्गुण है
सर्वस्व स्वीकार है वो ईश्वर है!
...
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