नया
-मंजुल भारद्वाज
नया ज़मीनी यथार्थ से अंकुरित हो
जड़ता की शिथिलता से उर्जित हो
सपनों,अपेक्षाओं,दुआओं,प्रार्थनाओं की
सहजता से जन्मा क्रांतिकारी आगाज़ हो!
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#नया #मंजुलभारद्वाज
‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज डायरी के पन्ने जब हम पलटते हैं फुर्सत के पलों में तो यकायक रोमांचित हो उठते हैं ! खो...
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