Thursday, November 7, 2019

मशरूम चबाते हुए वो कहता है! -मंजुल भारद्वाज

मशरूम चबाते हुए वो कहता है!
-मंजुल भारद्वाज
सकारात्मकता पर बड़ा ज़ोर है
मुंहबली ने कल कहा
देश नकारात्मकता से निकल चुका है
अब भेड़ों ने जिसे चुना हो
सवालों से जिसकी घिघी बंद जाती हो
उसका जब सब जयकारा करें
उसके लिए तो सावन हरा है
पर जहाँ बाढ़ और सूखा है
उसका क्या?
बेरोजगारी 45 साल में सबसे चरम पर
किसानों की आत्महत्या चरम पर
बैंकों की हालत खस्ता
आर्थिक व्यवस्था सांसे गिन रही है
सामाजिक ताना बाना तबाही की ओर है
बच्चों के मौत की सुनामी है
तार तार होती महिलाओं की
अस्मत की चीख चारों ओर है
मोबलिंचिंग चरम पर है
भीड़ के हाथों में न्याय व्यवस्था है
महंगाई पकौड़े तल रही है
और वो मशरूम चबाते हुए
कह रहा है सब सकारात्मक है
जागते रहो.... !
...
#सकारात्मक #जागते रहो #मंजुलभारद्वाज

No comments:

Post a Comment

आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज

  आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज   आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी …   आम्ही ज...