वो जो रहनुमा थे
-मंजुल भारद्वाज
वो जो रहनुमा बने थे तुम्हारे
वो क़ातिल निकले
वो जो क्रांति के सिरमौर थे
वो विकारियों के रिश्तेदार निकले
जिनसे उन्होंने हाथ मिलाया
वो झूठों के सरदार निकले
कहाँ हैं वो सम्पूर्ण क्रांति के महानायक
जिन्हाने विकारियों को जिंदा किया
कहाँ है वो क्रांति योद्धा
जो विकारियों की सत्ता का सारथि बना
वो अवसरवाद का रहनुमा निकला
विकारी नहीं थे कभी भी इतने ताकतवर
विचार वालों ने देश के साथ राष्ट्रघात किया
विचार को काटने के लिए
विकार के साथीदार गद्दार निकले!
…
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