योग दिवस पर गर्व है?
-मंजुल भारद्वाज
जिस देश के बच्चे रोज ICU में मर रहे हों
उस देश का प्रधानमंत्री मौन कैसे रह सकता है?
वो पड़ोस के राज्य में 40000 की भीड़ के साथ
कैसे योग करता है?
क्या मरते हुए बच्चों की तस्वीर
आँख बंद करते ही सामने नहीं आती होंगी?
हज़ारों की भीड़ गर्व से
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाते हुए
भारत के मरते बच्चों पर खामोश क्यों है?
पुनर्जन्म में आस्था रखने वाला समाज
राष्ट्रवाद के तिनके में कैसे जल सकता है?
आपकी संवेदनाओं को भोथरा करने देने वाले
समय का यह 1992 के बाद का भारत है
क्या यही नया भारत है?
जिसमें विवेक अपनी संवेदनाओं में
स्वयं जलकर भस्म हो जाएगा
सत्ता के मृदंग और नगाड़े बजते रहेगें
फिर भी
सन्नाटे में मरते बच्चों की आवाज़
आपकी रूह का दरवाज़ा खटखटाती रहेगी
मुझे गर्व है उस योग पर
जो शारीरिक क्रिया मात्र नहीं है
जो प्राणों को विवेक से आलोकित करता है
मनुष्य को संवेदनाओं से ओतप्रोत कर
उसे इंसान बनाता है
मुझे गर्व है उस योग पर !
...
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