शोध या विरक्ति ?
-मंजुल भारद्वाज
गहरे पानी पैठ
पानी से तर बतर तन
पर सुखा मन
हरियाली के बीचों बीच
सहरा में भटकता मन
चारों ओर भीड़
तन्हा तन्हा मन
बाहर शोर
अंदर ख़ामोशी
आसपास सांसारिक अपनों का मेला
फिर भी अकेला अकेला
यह शोध है या विरक्ति?
...
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