आत्मशोध
-मंजुल भारद्वाज
आत्म शोध क्या है
प्याज की एक एक परत
छीलने के सिवा
एक एक परत
यानी एक एक आवरण
दैनिक व्यवहार
विचार,मूल्यों और नजरिये में
विरोधाभास का बाँध टूटता है
भावनात्मक आवेग मन के अंदर
जमा कूड़ा करकट,गंदगी
मवाद, विकार, विष को
बहा देता है
अश्रुधारा बह निकलती है
सांसारिकता के पैमाने पर
आंसुओं के सिवा ‘कुछ’ मिलता नहीं है
आत्म अध्ययन के पैमानों पर
एक उर्वरक भूमि तैयार होती है
आत्म अवलोकन के सानिध्य में
आत्मदृष्टि चैतन्य साधना से
नई सृजन ‘दृष्टि’ का निर्माण करती है
सांसारिक विरोधाभास में उलझे
जीवन के दृष्टि और कोणों के
चक्रव्यूह को भेदने के
सूत्र सृजन का वैज्ञानिक तप है
संसार को उन्मुक्त करने के लिए!
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