Wednesday, November 6, 2019

पलायन -मंजुल भारद्वाज

पलायन

-मंजुल भारद्वाज

वो ताकता पहाड़

आग उगलता सूर्य

किसान की बेटी

बकरियों का झुण्ड

दीपकनुमा रौशनी में नहाये

पहाड़ की गोदी में लटके घर ।

जीवन की कठोरता , विवशता में अभिशप्त

अंधविश्वासों,भूतप्रेतों देवी देवताओं

कुरीतियों , कुप्रथाओं , बुरी आदतों से

ओत प्रोत , भ्रमित जन मानस ।

कुदरती संसाधनों , जल स्त्रोंतों ,

प्रपातों का कुप्रबंधन

कबीलाई संस्कृति का पुरातनपंथ ।

जलते चूल्हों से उड़ाती राख

आग में उड़ते पतंगें

नाज़ुक हाथों से पकती रोटियाँ ।

कंकालनुमा , धुंएँ से पुते ,

अपने शैशव , यौवन काल पर

शोकाकुल घर ।

अपनी जड़ों से पलायन करते ,

अनजान शहरी सपनो में खोये युवामन ।

अपनी हथेली पर खेती का गुलदस्ता लिए

निहारती , पुकारती किसी विरहन सी वादियाँ ।

…………….
#पलायन #पहाड़ #मंजुलभारद्वाज

No comments:

Post a Comment

आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज

  आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज   आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी …   आम्ही ज...