Tuesday, November 5, 2019

भीड़ भ्रम है! -मंजुल भारद्वाज

भीड़ भ्रम है!
-मंजुल भारद्वाज
भीड़ भ्रम है
विकार उन्मादी मवाद
जब जब भेडें चुनावी रैली में
जयकारा लगाती हैं
तब तब सत्ता पर
पाखंड का बोलबाला होता है
आज भेड़ों ने चुनावी रैली को
लोकतंत्र का जनाजा बना डाला
जिसका खामियाजा भुगतेंगी
आने वाली नस्लें !

#चुनाव #लोकतंत्र #मंजुलभारद्वाज

No comments:

Post a Comment

‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज

 ‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज डायरी के पन्ने जब हम पलटते हैं  फुर्सत के पलों में  तो यकायक रोमांचित हो उठते हैं !  खो...