Thursday, August 28, 2025

मूर्त ..अमूर्त के अन्तरिक्ष में -मंजुल भारद्वाज


मूर्त ..अमूर्त के अन्तरिक्ष में

-मंजुल भारद्वाज 


अलिप्त होकर 

जब मैं देखता हूँ  

तब पता चलता है 

मुझे अपने मुक्त होते उन्मुक्त में 

किसी की तलाश है  

इस भाव विश्व में 

एक आस – आभास का संकेत होता है 

संदेश होता है 

मैं अपनी ही राह  

देखता रहता हूँ 

एक स्थूल  ‘मैं’ 

अपने अमूर्त ‘मैं’ की तलाश में निरंतर

मूर्त ..अमूर्त के अन्तरिक्ष में रहता हूँ 

यही मेरा भ्रमण पथ 

सृजन पथ 

यही  मेरा सृजन कक्ष है 

यही मेरा सृजन स्थल है

जहाँ सहज निर्झर बहती है 

मेरी सृजन धारा ! 

मूर्त ..अमूर्त के अन्तरिक्ष में -मंजुल भारद्वाज  अलिप्त होकर  जब मैं देखता हूँ   तब पता चलता है  मुझे अपने मुक्त होते उन्मुक्त में  किसी की तलाश है   इस भाव विश्व में  एक आस – आभास का संकेत होता है  संदेश होता है  मैं अपनी ही राह   देखता रहता हूँ  एक स्थूल  ‘मैं’  अपने अमूर्त ‘मैं’ की तलाश में निरंतर मूर्त ..अमूर्त के अन्तरिक्ष में रहता हूँ  यही मेरा भ्रमण पथ  सृजन पथ  यही  मेरा सृजन कक्ष है  यही मेरा सृजन स्थल है जहाँ सहज निर्झर बहती है  मेरी सृजन धारा !  #मूर्त #अमूर्त #मंजुलभारद्वाज

#मूर्त #अमूर्त #मंजुलभारद्वाज

No comments:

Post a Comment

आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज

  आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज   आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी …   आम्ही ज...