द आईडिया ऑफ़ इंडिया
-मंजुल भारद्वाज
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
सत्ता आयोजित कार्यक्रम नहीं है
सत्ता का दिया तमगा नहीं है
इनाम में मिली जागीर नहीं
सदियों के संघर्ष की धरोहर है
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
अस्तित्व के संघर्ष की आहुति में
अनगिनत शहीदों का बलिदान है
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
विविधता के सहअस्तित्व का मानस है
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
बहुसांस्कृतिक जीवन का उत्सव है
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
छिछला राष्ट्रवाद नहीं
देशवासियों की एकजुटता का
एक दूसरे के प्रति सद्भावना
प्रेम,बन्धुता और भाईचारे का
सर्वसम्मत प्रतिबद्ध विचार है
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
चुनाव जीतने से ना बचेगा
चुनाव हारने से ना हारेगा
द आईडिया ऑफ़ इंडिया
चुनावी प्रकिया नहीं
देश की बुनियाद है
हाँ, यह सही है
आज देश की बुनियाद को खतरा है
पर वो खतरा चुनावी सत्ता से नहीं
जनमानस से है
आज भारत का मानस क्या है?
विविधता की अपनी अंदरूनी
सहअस्तित्व की चुनौतियां होती हैं
जिसे विचार दिशा देता है
पर जब देशवासी विकारग्रस्त हों
विकार महामारी बन जाए
तब द आईडिया ऑफ़ इंडिया के
रहनुमाओं को चुनावी हार-जीत से परे
व्यापक समाज से जुड़ना होगा
मीडिया के बाज़ार से निकल
गांधी की तरह देश से जुड़ना होगा
नेहरु की तरह भारत को खोजना होगा
भूमंडलीकरण के अभिशाप में पली
खरीदने और बेचने को अपना
जीवन सूत्र मानने वाली पीढ़ी को
भारत की मिटटी से जोड़ना होगा
तभी
द आईडिया ऑफ़ इंडिया बचेगा
और
अम्बेडकर के संविधान से चलेगा
आओ इस संकट काल में
देश की मिटटी से जुडें
द आईडिया ऑफ़ इंडिया को
जीवन का मिशन बनाएं!
...
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