Wednesday, November 6, 2019

जब अँधेरा बगावत कर दे ! - मंजुल भारद्वाज

जब अँधेरा बगावत कर दे !
-मंजुल भारद्वाज
जागना और जगाना
एकाकी प्रक्रिया है
जलते सूर्य की तरह
पत्ता नहीं कब धूप
असहनीय हो जाए
अँधेरा बगावत कर
कब पूछ बैठे
क्यों जलते हो इतना?
क्यों जागते हो इतना?
तुम होते कौन हो
जगाने वाले?
...
#जागना #अँधेरा #मंजुलभारद्वाज

No comments:

Post a Comment

आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज

  आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज   आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी …   आम्ही ज...