हासिल
-मंजुल भारद्वाज
कतरा कतरा रिसता है
यादों का बादल
भीगता रहता है
मन का आसमान
पसीजता हुआ मन
माथे पर नमक सा
उभरता है
जीवन के हासिल को
खोजते हुए!
...
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आम्ही आदिवासी – मंजुल भारद्वाज आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … देशाचे मूळ निवासी … आम्ही आदिवासी आदिवासी आदिवासी … आम्ही ज...
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