Tuesday, November 5, 2019

आओ भीड़ से नागरिक बने - मंजुल भारद्वाज

आओ भीड़ से नागरिक बने
-मंजुल भारद्वाज
हाँ माना की आपका जीवन
आपका निजी विश्व है
सामाजिक-राजनैतिक सरोकारों में
कब, कितना सहभागी होना है
यह आपका अधिकार है
यह आपका संविधान सम्मत अधिकार है
क्या आपको इस बात का भान है
अधिकार के साथ कर्तव्य जुड़ा है?
आज देश खतरे में है
संविधान खतरे में है
आपका अपना निजी विश्व खतरे में है
आपके घर में क्या बनेगा
यह सरकारी पार्टी तय कर रही है
आपकी निजी आज़ादी खतरे में है
आपको सवाल पूछने में डर लगता है
सवाल पूछने पर सरकारी पार्टी
आपको पड़ोसी देश भेजने की धमकी देती है
आप सच्चे देश भक्त हैं
पर आपको सरकारी पार्टी से
राष्ट्रभक्त होने का प्रमाण पत्र लेना पड़ता है
मीडिया उसको प्रचारित करता है
खूब मुनाफ़ा कमाता है
आपके पास रोज़गार का संकट है
आप महंगाई से त्रस्त हैं
जिनको आपने 2014 में चुना
सबका साथ,सबका विकास का वादा किया
वो आपकी हालत के लिए
नेहरु को जिम्मेदार मानते हैं
और आप नहीं पूछते की भाई
हमने नेहरु को नहीं आपको वोट किया है
आपके मुद्दों पर वो बात नहीं करना चाहते
आपको राष्ट्र भक्ति का डोज पिलाते हैं
मीडिया उनके कदमों में रेंगते हुए
आपको उन्मादी बना रहा है
एक व्यक्ति सरेआम जलसों में झूठ बोलता है
भीड़ तालियाँ पीटती है
मीडिया जयकारा लगाता है
आप चुप हैं,बेबस हैं, मौन हैं क्यों?
क्या आपके पास कालाधन था
जो आप लाइन में लगे थे?
हम राजनैतिक दलों के विरोधी नहीं हो सकते
पर हम सरकार से सवाल पूछ सकते हैं
सरकार अपने वादों में नाकाम हो
सिर्फ़ झूठ और जुमले हांके
उसको अपने वोट से बदल सकते हैं
2014 में भी यही किया था
2019 में क्यों नहीं?
विकल्प है हर नेता और पार्टी का विकल्प है
सिर्फ़ हमारे वोट का विकल्प नहीं है
हर नेता को हमारे वोट की ज़रूरत है
वोट दिया है देश नाम नहीं किया है
आओ भीड़ से नागरिक बने
अपने राजनैतिक बोध को जगाएं
लोकतंत्र को मजबूत बनाएं
किसी वंशवाद,व्यक्तिवाद से परे
एक दल विशेष की नहीं
एक ‘सर्व सम्मत’ नयी सरकार बनाएं!
...
#संविधान #वोट #लोकतंत्र #मंजुलभारद्वाज

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