तू ही तो है
-मंजुल भारद्वाज
तू ही तो है
मेरे मस्तिष्क में विचरता
मेरी साँसों में महकता
मेरी रंगों में लहू बनकर दौड़ता
तू ही तो है
मेरी आबो हवा
मेरे ललाट की आभा
मेरे चेहरे का नूर
तू ही तो है
मेरे जीवन का इन्द्रधनुष
मेरे ख्वाबों की खुशबु
मेरी उमंगों का रंग
तू ही तो है
आस्था की अंधी गह्वर के
चक्रव्यहू को भेदता मेरा आलोक
तू ही तो है
मेरी प्रकृति,मेरी प्रवृति
मेरे विकार को निरस्त
करता हुआ ब्रह्मास्त्र
तू ही तो है
मेरा हौंसला,प्रतिबद्दता
मेरा रंग और कर्म
तू ही तो है
बस तू ही
ऐ विचार,
तेरी महिमा अपरम्पार
प्राणी और मनुष्य का
एकमात्र भेद
विचार,विचार और विचार !
.....
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