सतत
-मंजुल भारद्वाज
स्पेस, समय, साध्य
साधना,समन्वय,सम्प्रेष्ण
सीमा,क्षितिज,सहर
सुर, संगीत, सृजन
सतत..सतत..सतत!
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#सतत #क्षितिज #सहर #मंजुलभारद्वाज
‘डायरी के पन्नो से नाटक के मंच तक’ - मंजुल भारद्वाज डायरी के पन्ने जब हम पलटते हैं फुर्सत के पलों में तो यकायक रोमांचित हो उठते हैं ! खो...
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